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Showing posts from March 27, 2022

BIMSTEC:THE BRIDGE BETWEEN SOUTH AND SOUTH EAST ASIA

  BIMSTEC:THE BRIDGE BETWEEN SOUTH AND SOUTH EAST ASIA    It is comparatively new organization which connect south and south east Asia countries. Originally formed as BIST-EC (Bangladesh, India, Sri Lanka and Thailand Economic Cooperation ) in 1997 , it became BIMST-EC after Myanmar joined, and BIMSTEC in 2004 with the inclusion of Nepal and Bhutan . What is BIMSTEC?   the Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation ( BIMSTEC ) why it is important for India and other members countries?    India had long felt that the potential of SAARC was being under-utilized, and opportunities were being missed due to lack of response and/or an obstructionist approach from Pakistan. At the SAARC summit in Kathmandu in 2014, Modi said these opportunities must be realized “through SAARC or outside it” and “among us all or some of us”. Bangladesh views BIMSTEC as a platform to position itself as more than just a small state on the Bay o...

आधुनिक छत्तीसगढ़ के गठन की कहानी भाग 2

  आधुनिक छत्तीसगढ़ के गठन की कहानी    पिछले क्लॉस में हमने देखा था की किस तरह वर्तमान में दिखने वाले छत्तीसगढ़ का स्वरूप अस्तित्व में आया और  छत्तीसगढ़ की मांग प्रारम्भ हुयी तथा मांग को जोर शोर से उठाने के लिए मंच का निर्माण किया गया।  आज हम इस क्लॉस  में छत्तीसगढ़ निर्माण के दूसरे तथा तीसरे चरण के विषय में विस्तृत चर्चा करेंगे। आजादी के बाद तथा मध्यप्रदेश गठन के पूर्व  आज़ादी के बाद भी छत्तीसगढ़ मध्यप्रांत तथा बरार का हिस्सा बना रहा। इस दौरान वर्ष 1955 में रायपुर के विधायक ठाकुर रामकृष्ण सिंह ने मध्यप्रांत के विधानसभा में पृथक छत्तीसगढ़ की मांग प्रस्तुत की। इस तरह यह पृथक छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पहला विधायी प्रयास था।  1 नवम्बर 1956 को मध्यप्रांत से पृथक होकर मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया। इस तरह पृथक मध्यप्रदेश के निर्माण ने पृथक छत्तीसगढ़ के मांग को और तेज़ कर दिया। इसी के साथ छत्तीसगढ़ निर्माण का तीसरा तथा अंतिम चरण प्रारम्भ होता है।  मध्यप्रदेश से अलग होकर पृथक पूर्ण राज्य बनने का कालक्रम वर्ष 1956 में 28 जनवरी को डॉ खूबचंद बघेल ने पृथक छत्तीस...

श्रीलंका संकट

 श्रीलंका संकट    श्रीलंका हमारे देश के दक्षिण में स्थित पडोसी देश है। आजकल यह लगातार में चर्चा में बना हुआ है। चर्चा में बने रहने का कारण श्रीलंका में गहराता आर्थिक संकट है। यहाँ आर्थिक संकट इतना गहरा हो चूका है की विशेषज्ञो ने अनुमान लगाया है की यह बहुत जल्द आर्थिक रूप से दिवालिया हो सकता है।  यहाँ की आर्थिक संकट को निम्न उदाहरणो के द्वारा समझा जा सकता है -  यहाँ 13 घंटों की बिजली कटौती की जा रही है।   यहाँ के शिक्षा विभाग के पास स्याही तथा कागज़ खरीदने के लिए पैसा नहीं है जिसकी वजहों से यहाँ बोर्ड एग्जाम नहीं हो पा रहा है।   यहाँ एक कप चाय की कीमत 100  श्रीलंकाई रूपए    है।   एक सिलेंडर गैस की कीमत लगभग 4200  श्रीलंकाई रूपए   है। इसके इस संकट के पीछे निम्न कारण है - यहाँ आय का प्रमुख स्रोत पर्यटन है। परन्तु कोरोना तथा चर्च पर आतंकी हमले ( the Easter bomb blasts of April 2019 ) के चलते यहाँ का पर्यटन सेक्टर बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। परिणामतः विदेशी मुद्रा की आवक श्रीलंका में बहुत कम हो गयी है। करी...

आधुनिक छत्तीसगढ़ के गठन की कहानी

  आधुनिक छत्तीसगढ़ के गठन की कहानी  वर्तमान में हमे जो छत्तीसगढ भारत के नक्शे में नजर आता है वह कोई एक दिन में नहीं बना अपितु एक लंबे समयांतराल तथा कई चरणों में बना।आज हम इसी के विषय में विस्तृत रूप से चर्चा करेंगे। इस कालक्रम को तीन चरणों में विभाजित कर सकते हैं: आजादी से पहले का कालक्रम आजादी के बाद तथा मध्यप्रदेश गठन के पूर्व  मध्यप्रदेश से अलग होकर पृथक पूर्ण राज्य बनने का कालक्रम आजादी के पहले का कालक्रम आधुनिक छत्तीसगढ के निर्माण का प्रथम चरण 2 नवंबर 1861 से प्रारंभ होता है। इस वर्ष पहली बार छत्तीसगढ को मध्यप्रांत का हिस्सा बनाया गया। उल्लेखनीय है की रघुजी तृतीय के निःसंतान मृत्यु के पश्चात तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने हड़प नीति के तहत नागपुर को ब्रिटिश साम्राज्य में शामिल कर लिया। कालांतर में यही नागपुर साम्राज्य मध्यप्रांत तथा बरार के रूप में तब्दील हो गया। वर्ष 1862 में छत्तीसगढ को मध्यप्रांत के अंतर्गत एक संभाग बनाया गया। इसके अंतर्गत तीन जिले शामिल किए गए थे : रायपुर बिलासपुर संबलपुर स्मरणीय है की बस्तर को उस समय गोदावरी संभाग के अंतर्गत शामिल किया ग...